आज हमारे बीच ईश्वर मौजूद हैं पर हम उसे पहचानते हैं या नहीं
देखिए वह किस रुप में हमें मिलते हैं
जो नौ महीने दर्द सहती
फिर भी हमें अपने आंचल में रखती
हमें सुलाने के लिए रातो को जगती
हमारी कमियों को बिना बताये पूरा करती
ऐसा कोई और नही सिर्फ हमारी माँ ही होती
हम जब कोई शैतानी करते
तब हमको वो मार लगाती
फिर अकेले में जाकर अपने अश्क बहाती
क्यो मारा अपने लाल को ऐसा वो कहती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ ही होती
जब बाहर कमाने जिम्मेदारी भेजती
तब उसकी आंखे हमारा रास्ता देखती
जब थक कर हमारा सर दुखता
तब हमारे माथे को वो प्यार से सहलाती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी मां ही होती
कभी दर्द से आह हमारे निकलती
जैसे चोट हमारे नहीं उसके लगती
तब आंखो में सैलाब है भरती
मन ही मन हमारे ठीक होने की प्रार्थना करती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ होती
देखिए वह किस रुप में हमें मिलते हैं
जो नौ महीने दर्द सहती
फिर भी हमें अपने आंचल में रखती
हमें सुलाने के लिए रातो को जगती
हमारी कमियों को बिना बताये पूरा करती
ऐसा कोई और नही सिर्फ हमारी माँ ही होती
हम जब कोई शैतानी करते
तब हमको वो मार लगाती
फिर अकेले में जाकर अपने अश्क बहाती
क्यो मारा अपने लाल को ऐसा वो कहती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ ही होती
जब बाहर कमाने जिम्मेदारी भेजती
तब उसकी आंखे हमारा रास्ता देखती
जब थक कर हमारा सर दुखता
तब हमारे माथे को वो प्यार से सहलाती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी मां ही होती
कभी दर्द से आह हमारे निकलती
जैसे चोट हमारे नहीं उसके लगती
तब आंखो में सैलाब है भरती
मन ही मन हमारे ठीक होने की प्रार्थना करती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ होती
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