Monday, May 23, 2011

ईश्वर का रुप

आज हमारे बीच ईश्वर मौजूद हैं पर हम उसे पहचानते हैं या नहीं
देखिए वह किस रुप में हमें मिलते हैं


जो नौ महीने दर्द सहती
फिर भी हमें अपने आंचल में रखती
हमें सुलाने के लिए रातो को जगती
हमारी कमियों को बिना बताये पूरा करती
ऐसा कोई और नही सिर्फ हमारी माँ ही होती

हम जब कोई शैतानी करते
तब हमको वो मार लगाती
फिर अकेले में जाकर अपने अश्क बहाती
क्यो मारा अपने लाल को ऐसा वो कहती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ ही होती

जब बाहर कमाने जिम्मेदारी भेजती
तब उसकी आंखे हमारा रास्ता देखती
जब थक कर हमारा सर दुखता
तब हमारे माथे को वो प्यार से सहलाती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी मां ही होती

कभी दर्द से आह हमारे निकलती
जैसे चोट हमारे नहीं उसके लगती
तब आंखो में सैलाब है भरती
मन ही मन हमारे ठीक होने की प्रार्थना करती
ऐसा कोई और नहीं सिर्फ हमारी माँ होती

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